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वंशी राजा महाशिवगुप्त को सिरपुर अभिलेख

 मध्य प्रदेश के एक गुप्त वंशी राजा महाशिवगुप्त को सिरपुर अभिलेख में चंद्रवंशी क्षत्रिय कहा गया बिहार में पाए गए ताम्रपत्र अभिलेख में गुप्त उपाधि वाले छह राजाओं का नाम मिलता है यह अपने आप को शैव मता लंबी और अर्जुन का वंशज मानते हैं इन्हें सोमवंशी क्षत्रीय  बताया गया है जावा के एक ग्रंथ तंत्र कामन्दक में  इच्छ वा कु के वन्ससिय महाराज ऐश्वर्या पाल अपने को समुद्र गुप्त परिवार से संबंध बताते हैं गुप्त राजाओं के lichhavi  vakatak से भी वैवाहिक संबंध था

अयोध्या के अंतिम सूर्यवंशी राजा

 समित्र अयोध्या के अंतिम राजा थे, महापद्मनंद से हार के बाद वह रोहताश ( बिहार ) चले गए । ( बुद्ध पूर्व भारत का इतिहास मिश्र बंधु पृष्ठ -363 ) इसके बाद समित्र के वंसज रोहताश के आसपास रहने लगे, समित्र के दो पुत्र शालीवाहन देव विश्वराज ओर भाई कर्म थे । ये लोग सुमित्र और कुरम सुरथ के पुत्र थे भावार्थ - सुमित्र जो नृप ( ब्राह्मणो को दान देने वाला, उनका रक्षक)  ने अपने योगबल से अपने शरीर का त्याग कर दिया, सुमित्र के दो पुत्र हुए, विश्वराज ओर कूर्म ।। कूर्म विश्वधर के अनुज थे, ओर उन्ही से आगे कच्छवाहा वंश की उन्नति हुई । कूर्म के दौ पुत्र हुए, कुत्सवाघ ( कच्छव) ओर बुद्धिसेन । उनके बाद सेन नामधारी कई व्यक्ति इस वंश में हुए, उनके पश्चात शंकरदेव हुए । तारीखें कश्मीर ( लेखक - मुल्ला अहमद ) सफरनामा ( लेखक - दिवाकर मिहिर ) ओर राजतरंगिणी के अनुसार प. राजसहाय भट्टाचार्य जी ने अपनी पुस्तक कच्छवाह धार का इतिहास लिखते हुए कहते है - शंकरदेव के पश्चात क्रमशः - कृष्ण - कुश - यशोदेव - राजभानु - कर्ममिहिप हुए ।  इसमें से कर्ममिहिप चन्द्रगुप्त मौर्य के मित्र थे ।( कच्छवाहा धार का इतिहास - पेज 46 ...

ब्राह्मी और देवनागरी लिपि को जानिए

 ■■ब्राह्मी और देवनागरी लिपि को जानिए!■■ संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है तथा समस्त भारतीय भाषाओं की जननी है। 'संस्कृत' का शाब्दिक अर्थ है 'परिपूर्ण भाषा'। संस्कृत से पहले दुनिया छोटी-छोटी, टूटी-फूटी बोलियों में बंटी थी जिनका कोई व्याकरण नहीं था और जिनका कोई भाषा कोष भी नहीं था। कुछ बोलियों ने संस्कृत को देखकर खुद को विकसित किया और वे भी एक भाषा बन गईं। सभी भाषाओं की जननी संस्कृत ब्राह्मी और देवनागरी लिपि : भाषा को लिपियों में लिखने का प्रचलन भारत में ही शुरू हुआ। भारत से इसे सुमेरियन, बेबीलोनीयन और यूनानी लोगों ने सीखा। प्राचीनकाल में ब्राह्मी और देवनागरी लिपि का प्रचलन था। ब्राह्मी और देवनागरी लिपियों से ही दुनियाभर की अन्य लिपियों का जन्म हुआ। ब्राह्मी लिपि एक प्राचीन लिपि है जिससे कई एशियाई लिपियों का विकास हुआ है। ब्राह्मी भी खरोष्ठी की तरह ही पूरे एशिया में फैली हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि ब्राह्मी लिपि 10,000 साल पुरानी है लेकिन यह भी कहा जाता है कि यह लिपि उससे भी ज्यादा पुरानी है। सम्राट अशोक ने भी इस लिपि को अपनाया : महान सम्राट अशोक ने ब्राह्मी लिपि को धम...

रघुवंश का इतिहास:-

 *जयश्री राम *   रघुवंश का इतिहास:- "भाग-2" ---------------------------------------            कौशलजनपद (साकेत/अयोध्या) के अंतिम रघुवंशी राजा सुमित्र थे। लगभग 411 ईपू. में मगध के शासक महापद्यनंद ने कौशल पर आक्रमण कर अयोध्या के अंतिम रघुवंशी राजा सुमित्र को हराकर उन्हें अयोध्या/साकेत से निष्कासित कर दिया था। महापद्मनंद ने कौशलजनपद को मगध में मिलाकर, मगध का एक प्रांत बनाकर इसका शासन भरों को सौप दिया था। जो श्रावस्ती से शासन करने लगे थे। इस प्रकार कौशल पर नंदवंश का शासन हो गया था। " उत्तर कौशल के रघुवंशी " :-               सरयु नदी से लेकर नेपाल की तराई तक का क्षेत्र उत्तर कौशल कहलाता था। उत्तर कौशल के रघुवंशी प्रभु श्रीराम के छोटे पुत्र लव के वंशज थे। नंदवंश के समय उत्तर कौशल में रघुवंशी बहराइच, श्रावस्ती क्षेत्र में तथा बस्ती से गोरखपुर के बीच के क्षेत्र में रहते थे। नंदवंश के शासनकाल में उत्तर कौशल (उत्तरीअवध) के वहराइच, श्रावस्ती क्षेत्र के रघुवंशी पलायन करके पंजाब से होते हुए जम्मू कश्मीर व पाकिस्तान ...

कश्मीर के कर्कोट नाग वंश के राजा श्री ललितादित्य मुक्तापीड

 मौखरि राजा यशोवर्मन के बाद उनके मित्र कश्मीर के कर्कोट नाग वंश के राजा श्री ललितादित्य मुक्तापीड सम्राट बने जिन्होंने संपूर्ण भारत पर विजय प्राप्त की। जिनका युद्ध कार्तिकेय पुर राजवंश के बसंत देव से हुए था इस युद्ध में जितने के बाद बसंत देव उत्तराखंड के सम्राट बने ललितादित्य मुक्तापीड  राज्याभिषेक की तिथि 732 ई. मानी जाती है। इस समय तक सम्राट यशोवर्मन वृद्ध हो गये थे। अपनी विशाल विजयों के कारण, ललितादित्य अपने समय का सबसे प्रमुख भारतीय शासक बन गया, जिसकी विजयें संभवतः गुप्त सम्राटों के बाद सबसे व्यापक थीं। कल्हण की राजतरंगिणी के अनुसार सम्राट ललितादित्य का विजय अभियान कन्नौज, मगध, गौड़, कलिंग, कर्नाट पर विजय प्राप्त करने के बाद कावेरी के तट तक पहुँचा। वहां से उसने पश्चिम में सप्राकोंकन, द्वारिका और अवंती पर और उत्तर में कम्बोज, तुषारस, मुमुनिस, तिब्बती, दर्दस, प्रागज्योतिष, श्रीराज्य और उत्तर कुरु पर विजय प्राप्त की। अरब सेनापति कुतैव ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। सम्राट ललितादित्य आगे बढ़े और अरब मुस्लिम सेना को कड़ा जवाब दिया। अरब सेनापति कुतैब मारा गया और शेष सेना भाग गई...

नाग वंश के राजा श्री ललितादित्य मुक्तापीड

 मौखरि राजा यशोवर्मन के बाद उनके मित्र कश्मीर के कर्कोट नाग वंश के राजा श्री ललितादित्य मुक्तापीड सम्राट बने जिन्होंने संपूर्ण भारत पर विजय प्राप्त की। जिनका युद्ध कार्तिकेय पुर राजवंश के बसंत देव से हुए था इस युद्ध में जितने के बाद बसंत देव उत्तराखंड के सम्राट बने ललितादित्य मुक्तापीड  राज्याभिषेक की तिथि 732 ई. मानी जाती है। इस समय तक सम्राट यशोवर्मन वृद्ध हो गये थे। अपनी विशाल विजयों के कारण, ललितादित्य अपने समय का सबसे प्रमुख भारतीय शासक बन गया, जिसकी विजयें संभवतः गुप्त सम्राटों के बाद सबसे व्यापक थीं। कल्हण की राजतरंगिणी के अनुसार सम्राट ललितादित्य का विजय अभियान कन्नौज, मगध, गौड़, कलिंग, कर्नाट पर विजय प्राप्त करने के बाद कावेरी के तट तक पहुँचा। वहां से उसने पश्चिम में सप्राकोंकन, द्वारिका और अवंती पर और उत्तर में कम्बोज, तुषारस, मुमुनिस, तिब्बती, दर्दस, प्रागज्योतिष, श्रीराज्य और उत्तर कुरु पर विजय प्राप्त की। अरब सेनापति कुतैव ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। सम्राट ललितादित्य आगे बढ़े और अरब मुस्लिम सेना को कड़ा जवाब दिया। अरब सेनापति कुतैब मारा गया और शेष सेना भाग गई...

नवनाथ और 84 सिद्ध नाथ संप्रदाय

 नवनाथ : आदिनाथ, अचल अचंभानाथ, संतोषनाथ, सत्यानाथ, उदयनाथ, गजबलिनाथ, चौरंगीनाथ, मत्स्येंद्रनाथ और गौरखनाथ। 84 SIDHA 1. कपिल नाथ जी 2. सनक नाथ जी 3. लंक्नाथ रवें जी 4. सनातन नाथ जी 5. विचार नाथ जी / भ्रिथारी नाथ जी 6. चक्रनाथ जी 7. नरमी नाथ जी 8. रत्तन नाथ जी 9. श्रृंगेरी नाथ जी 10. सनंदन नाथ जी 11. निवृति नाथ जी 12. सनत कुमार जी 13. ज्वालेंद्र नाथ जी 14. सरस्वती नाथ जी 15. ब्राह्मी नाथ जी 16. प्रभुदेव नाथ जी 17. कनकी नाथ जी 18. धुन्धकर नाथ जी 19. नारद देव नाथ जी 20. मंजू नाथ जी 21. मानसी नाथ जी 22. वीर नाथ जी 23. हरिते नाथ जी 24. नागार्जुन नाथ जी 25. भुस्कई नाथ जी 26. मदर नाथ जी 27. गाहिनी नाथ जी 28. भूचर नाथ जी 29. हम्ब्ब नाथ जी 30. वक्र नाथ जी 31. चर्पट नाथ जी 32. बिलेश्याँ नाथ जी 33. कनिपा नाथ जी 34. बिर्बुंक नाथ जी 35. ज्ञानेश्वर नाथ जी 36. तारा नाथ जी 37. सुरानंद नाथ जी 38. सिद्ध बुध नाथ जी 39. भागे नाथ जी 40. पीपल नाथ जी 41. चंद्र नाथ जी 42. भद्र नाथ जी 43. एक नाथ जी 44. मानिक नाथ जी 45. गेहेल्लेअराव नाथ जी 46. काया नाथ जी 47. बाबा मस्त नाथ जी 48. यज्यावालाक्य नाथ जी 49. गौर ...