हिमालय के अति प्राचीन राजवंश कुलिन्द राजवंश का परिचय
वाल्मीकि कृत रामायण के अनुसार शरदंड नदी को पार करके कुलिंग में प्रवेश करने का उल्लेख है। पुनः आगे कई पर्वतों व नदियों को पार करने के विवरण में व्यास नदी को पार करने का उल्लेख है। इस आधार पर विजयेन्द्र कुमार माथुर कुलिंग नगरी की स्थिति सतलुज और व्यास के बीच बताते हैं। “ते प्रसन्नोदकां दिव्यां नानाविहगसेवितम्। उपातिजग्मुर्वेगेन शरदण्डां जनाकुलाम्॥१५॥” “निकूलवृक्षमासाद्य दिव्यं सत्योपयाचनम्। अभिगम्याभिवाद्यं तं कुलिङ्गा प्राविशन्पुरीम्॥१६॥” “विष्णोः पदं प्रेक्षमाणा विपाशां चापि शाल्मीलम्। नदीर्वापीस्तटाकानि पल्वलानि सरांसि च॥१९॥” — सर्ग-६८; अयोध्याकाण्ड सम्भव है कि कुलिंग नगरी का सम्बन्ध महाभारत में उल्लिखित कुलिंदों से हो। उदीच्याश्च तथा भोजाः कुलान्यष्टादश प्रभो। जरासंधभयादेव प्रतीचीं दिशमास्थिताः॥२५॥ शूरसेना भद्रकारा बोधाः शाल्वाः पटच्चराः। महाभारत में विवरण मिलता है कि अर्जुन ने अपनी दिग्विजय यात्रा में कुलिंदों के साथ-साथ कालकूट राज्य को भी जीत लिया था। पूर्व कुलिन्दविषये वशे चक्रे महीपतीन्। धनंजयो महाबाहुर्नातितीव्रेण कर्मणा॥३॥ आनर्तान् कालकूटांश्च कुलिन्दांश्च विजित्य सः। सुम...