महाराजा विक्रमादित्य और सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय के बीच मुख्य संबंध
महाराजा विक्रमादित्य और सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय के बीच मुख्य संबंध **'विक्रमादित्य' की उपाधि** और उनके द्वारा **शकों पर प्राप्त विजय** है, हालांकि वे इतिहास के दो अलग-अलग कालखंडों के शासक थे। स्रोतों के आधार पर उनके संबंधों और अंतर को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है: * **अलग-अलग समय काल:** महाराजा विक्रमादित्य **पहली शताब्दी ईसा पूर्व** (लगभग 82 ई.पू. से 19 ईस्वी) के शासक थे, जिन्होंने 57 ई.पू. में **विक्रम संवत** की शुरुआत की थी। इसके विपरीत, सम्राट **चंद्रगुप्त द्वितीय** गुप्त वंश के शासक थे जो उनके लगभग **300 से 400 वर्ष बाद** (चौथी शताब्दी ईस्वी में) हुए थे। * **नाम बनाम उपाधि:** पहली शताब्दी ई.पू. के शासक का जन्म का नाम ही **विक्रमादित्य** था, और उनके पिता राजा गंधर्वसेन थे। दूसरी ओर, चंद्रगुप्त द्वितीय ने अपनी महानता और वीरता के कारण **'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की थी**। * **शकों पर विजय (शकारि):** दोनों ही शासकों को **'शकारि'** (शकों का शत्रु) कहा जाता है। मूल विक्रमादित्य ने पहली शताब्दी ई.पू. में शकों को पराजित कर भारत को उनक...