तालेश्वर ताम्रपत्र उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास :somvanshi क्षत्रिय
छठी शताब्दी विक्रम संवत के आसपास का द्युतिवर्मन (दिजवर्मन) का तालेश्वर ताम्रपत्र उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभिलेख है। यह संस्कृत भाषा और उत्तर-गुप्त ब्राह्मी (कुटिला) लिपि में लिखा गया भूमि दान संबंधी शासकीय आदेश है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें शासक को स्पष्ट रूप से “सोमवंशी क्षत्रिय” कहा गया है—“सोमवंशोद्भवो राजा…”, जो हिमालयी अभिलेखों में बहुत दुर्लभ और स्पष्ट उल्लेख माना जाता है, क्योंकि अन्य कई वंशों में ऐसी सीधी पहचान नहीं मिलती। इस ताम्रपत्र में भूमि दान, अधिकारियों, ग्रामों और प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह कोई असंगठित सत्ता नहीं बल्कि एक विकसित और शास्त्रीय परंपरा वाला राज्य था, जहाँ धार्मिक दान और राजकीय व्यवस्था व्यवस्थित रूप से चल रही थी। साथ ही इसमें “कार्तिकेयपुर” (गोमती घाटी, वर्तमान बैजनाथ क्षेत्र) का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जिससे पता चलता है कि यह स्थान कत्यूरियों से पहले ही एक महत्वपूर्ण बसा हुआ केंद्र था, जिसे बाद में कत्यूर शासकों ने विकसित कर राजधानी के रूप में स्थापित किया।डॉ शिव कु...