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मौर्य वंश सूर्यवंश है

 सुतः कश्यपोभू -- तदनु मनुरभूत्तत्द्युतात्सूर्यवंश:। विख्यात: सर्वलोकेष्वमल नृपगुणैरन्वित:कीर्तिधर्मौर्म्मान्धातुर्भूमिपालात्स कलगुणनिधेन्मौर्य वंशो इस पंक्ति से मनु, मान्धाता, मोर्यवंश तथा सूर्यवंश का ऐक्य अथवा समानाधिकरण सिद्ध होता है। इसी अभिलेख में वाघली के अन्य मौर्यवंशी राजाओं के नाम भी हैं जैसे - कीकट मौर्य, तक्षक मौर्य, भीम मौर्य, गौविंदराज मौर्य आदि अभिलेख में मौर्य प्रसाद में ब्राह्मणों को संरक्षण तथा जगह जगह भगवान शिव की स्तुति है जिसे तीसरी पंक्ति में भी देखा जा सकता है। अत: इस अभिलेख से सिद्ध होता है कि मौर्यवंशी सूर्यवंशी क्षत्रिय है