बच्छिल (बाछिल/बच्हल) क्षत्रिय (राजपूत): इतिहास, परंपरा और ऐतिहासिक साक्ष्य

 बच्छिल (बाछिल/बच्हल) क्षत्रिय (राजपूत): इतिहास, परंपरा और ऐतिहासिक साक्ष्य


बच्छिल (Bachhil/Bachhal/Bachhil) राजपूत उत्तर भारत का एक प्राचीन राजपूत कुल माना जाता है। इनका प्रमुख निवास वर्तमान उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर, बदायूँ, खीरी, सीतापुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर तथा मथुरा क्षेत्रों में रहा है। इनके इतिहास का आधार स्थानीय परंपराएँ, भाट-चारणों की वंशावलियाँ, ब्रिटिशकालीन गजेटियर तथा औपनिवेशिक काल के राजपूत कुल-वर्णन हैं। हालांकि इनके प्रारम्भिक इतिहास के अनेक दावे ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सिद्ध नहीं हैं।


बच्छिल नाम की उत्पत्ति


बच्छिल, बाछिल, बच्हल अथवा Bachhal एक ही राजपूत कुल के विभिन्न रूप माने जाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में इनके नाम का उच्चारण अलग-अलग मिलता है।


वंश परंपरा


राजपूतों की पारंपरिक 36 शाही कुलों की वंशावलियों में बच्छिलों को सामान्यतः चंद्रवंशी (सोमवंशी) शाखा में रखा जाता है।


कुछ भाट-चारण परंपराओं में इन्हें **तोमर (तंवर) वंश** की एक उपशाखा भी माना गया है। यह परंपरागत वंशावली है; इसका कोई प्रारम्भिक अभिलेखीय (शिलालेख/ताम्रपत्र) प्रमाण अभी तक उपलब्ध नहीं है।


राजा वेन से संबंध


ब्रिटिशकालीन विवरणों में उल्लेख मिलता है कि बच्छिल स्वयं को राजा वेन (Vena) का वंशज मानते थे।


यह एक पारंपरिक वंश दावा है, जिसका प्रत्यक्ष ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।


 बरखर के राजा विराट 


कुछ परंपराओं के अनुसार बच्छिल कुल के संस्थापक खीरी जिले के बरखर के राजा विराट माने जाते हैं।


लोककथा के अनुसार:


* उन्होंने वनवास के समय पाँचों पांडवों का आतिथ्य किया।

* उनके शासन में अनेक नहरें बनवाई गईं।

* उन नहरों के अवशेष बाद के समय तक दिखाई देने की बात कही जाती है।


यह विवरण मुख्यतः लोकपरंपरा पर आधारित है।


रोहिलखंड में प्रभुत्व


औपनिवेशिक काल के एक प्रसिद्ध विवरण में लिखा गया है—


"Their earliest settlements were in Rohilkhand, where they were the dominant race until 1174."


अर्थात—

बच्छिलों की प्रारम्भिक बस्तियाँ रोहिलखंड में थीं और 1174 ईस्वी तक वहाँ उनका प्रमुख प्रभाव माना जाता था।


यह विवरण औपनिवेशिक लेखन पर आधारित है, जिसे आधुनिक इतिहासकार सावधानी से पढ़ने की सलाह देते हैं क्योंकि इसके लिए स्वतंत्र समकालीन अभिलेख सीमित हैं।


तिलहर के संस्थापक राजा तिलोक (त्रिलोक) चंद


स्थानीय परंपरा के अनुसार—


* राजा तिलोक (त्रिलोक) चंद बच्छिल** ने तिलहर नगर बसाया।

* उनके नाम पर **तिलोकपुर** गाँव का नाम पड़ा।

* उन्होंने तिलहर में एक गढ़ (किला) बनवाया।

* किले के अवशेष डाटागंज मोहल्ले के आसपास बताए जाते हैं।


इन तथ्यों का उल्लेख स्थानीय इतिहास में मिलता है, लेकिन इनकी पुष्टि के लिए विस्तृत पुरातात्त्विक अध्ययन अपेक्षित है।

 क्या वर्तमान बच्छिल परिवार उनके वंशज हैं?


तिलहर और तिलोकपुर के अनेक बच्छिल ठाकुर परिवार स्वयं को राजा तिलोक चंद का वंशज मानते हैं।


किन्तु किसी विशेष परिवार की वंशावली सिद्ध करने के लिए निम्न स्रोत सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं—


* शाहजहाँपुर जिला गजेटियर

* बदायूँ जिला गजेटियर

* पुराने बंदोबस्त अभिलेख

* जमींदारी रिकॉर्ड

* भाट एवं जागा परिवारों की वंशावली बहियाँ

* पारिवारिक वंशावलियाँ


बच्छिलों का प्रमुख क्षेत्र


आज भी बच्छिल राजपूत मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में पाए जाते हैं—


* शाहजहाँपुर

* तिलहर

* तिलोकपुर

* कटरा

* पुवायाँ

* बदायूँ

* खीरी

* सीतापुर

* मुरादाबाद

* बुलंदशहर

* मथुरा

निष्कर्ष

बच्छिल राजपूत उत्तर भारत का एक प्राचीन एवं प्रतिष्ठित क्षत्रिय कुल माना जाता है। परंपरागत वंशावलियों में इन्हें चंद्रवंशी तथा कुछ परंपराओं में तोमर वंश की शाखा बताया गया है। राजा वेन, राजा बैराट तथा तिलोक चंद से जुड़े विवरण मुख्यतः लोकपरंपरा और औपनिवेशिक स्रोतों में मिलते हैं। वहीं तिलहर और तिलोकपुर से उनका संबंध स्थानीय इतिहास का महत्वपूर्ण भाग है। संकलनकर्ता अखिलेश बहादुर पाल स्रोत https://www.indianrajputs.com/history/ गजेटियर

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