उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य

 उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ और पुरातत्वविदों के शोध के अनुसार, राजा विक्रमादित्य से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण और नए पुरातत्व साक्ष्य (Archaeological Evidence) मिले हैं:1. उज्जैन से मिला सोने का प्राचीन सिक्काहाल के वर्षों में उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट से एक छोटा सोने का सिक्का मिला है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस सिक्के के एक तरफ राजा विक्रमादित्य का चेहरा (चित्र) बना हुआ है और दूसरी तरफ ईसा पूर्व पहली शताब्दी (1st Century BCE) के पारंपरिक चिन्ह बने हैं। शोधकर्ता इसे राजा विक्रम का सबसे बड़ा ठोस सबूत मानते हैं।2. 'राजा विक्रम' और 'कृत' लिखे सिक्केजयपुर और उज्जैन के मुद्रा संग्रहकर्ताओं को प्राचीन सिक्के मिले हैं, जिन पर प्राचीन लिपि में "राजा विक्रम" और "कृत" लिखा हुआ है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, लिपि विशेषज्ञों ने जांच में पाया कि इतिहास में विक्रमादित्य को ही 'कृत' भी कहा जाता था और इन सिक्कों से उनके अस्तित्व की पुष्टि होती है।3. गढ़कालिका से मिट्टी की मुहरसाल 1975 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को उज्जैन के गढ़कालिका क्षेत्र से मिट्टी की एक प्राचीन मुहर (Terracotta Seal) मिली थी। इस मुहर पर प्राचीन लिपि में उज्जैन के राजा का जिक्र है, जो उस कालखंड की ओर इशारा करता है।4. महाकालेश्वर मंदिर की 2100 साल पुरानी दीवारउज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास हुई खुदाई में एक प्राचीन दीवार और त्रिशूल का चिन्ह मिला है, जो करीब 2100 साल पुराना (ईसा पूर्व पहली शताब्दी का) माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा विक्रमादित्य भगवान शिव के परम भक्त थे और उन्होंने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।5. भविष्य पुराण में लिखित साक्ष्यसनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथ 'भविष्य पुराण' (प्रतिसर्ग पर्व) में स्पष्ट रूप से लिखा है कि राजा विक्रमादित्य ने मालवा (उज्जैन) पर शासन किया था। उसमें उनके पिता का नाम 'गंधर्वसेन' बताया गया है।

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