दिव्य संत की समाधि

 दिव्य संत की समाधि

मां मानिला मन्दिर के दिव्य संत की समाधि, मां मानिला मन्दिर के पश्चिम में  सामने वाले जंगल की छोटी पहाड़ी पर करीब दो तीन सौ मीटर पर स्थित है यह समाधि संभवतः तीन चार सौ वर्ष पुरानी है जिसका सही समय ज्ञात नहीं है यह समाधि एक ऐसे संत की है जिन्हें भगवान तुल्य किसी दिव्य महाविभूति संत के दर्शन हुए 

       कहा जाता है कि संत जी मां मानिला मन्दिर के अग्नि कुंड के पास में सायंकाल में बैठे थे तभी वहां पर एक दिव्य संत का आगमन हुआ उन्होंने आजकल की चाय जैसे किसी पेय को बनाने के लिए कहा जिसकी सामग्री मां मानिला में रहने वाले संत जी के पास नहीं थी और उन्होंने वह पेय बनाने में असमर्थता प्रकट की दिव्य संत के आग्रह पर उन्होंने वर्तन में पानी गर्म करने के लिए अग्निकुंड पर  रख दिया और दिव्य संत जी ने प्रत्येक सामग्री के बदले अपने चिमटे की नोक से अग्नि कुंड से थोड़ी भस्म उठाई और गर्म जल में डालते गये और वह पेय पूर्ण रुप में तैयार हो गया और दोनों संतो ने उस पेय को माता को भोग लगाकर ग्रहण किया 

      तत्पश्चात मां मानिला के संत जी ने भोग प्रसाद तैयार किया और दिव्य संत जी से भोग पाने का आग्रह किया इस पर दिव्य संत जी ने कहा कि वे भोग प्रसाद गंगा स्नान कर ही ग्रहण करते हैं मां मानिला के दिव्य  संत जी ने कहा कि रामगंगा नदी यहां से करीब पांच छः मील पर है और आते समय पूरी चढाई  है आते जाते व स्नान करने में पूरी रात्रि लगभग लग जायेगी अर्थात ब्रह्म मूहुर्त का समय हो जायेगा लेकिन वे संत नहीं माने अंत में, मां मानिला के संत जी को गंगा स्नान के लिए मानना पड़ा वे दिव्य संत मां मानिला के संत जी को वायु मार्ग से कुछ ही क्षणों में रामगंगा नदी तक ले गये और स्नान कर वायु मार्ग ने पुनः मां मानिला मन्दिर  में पहुंच कर भोग प्रसाद ग्रहण  किया और रात्रि विश्राम  करने लगे ब्रह्म  मूहुर्त के प्रथम पहर पर दोनों संत उठे और दिव्य  संत जी ने विदाई ली और मां मानिला के संत जी को उपरोक्त  का घटना का विवरण किसी से भी साझा नहीं करने का वचन लिया कुछ समय तक मां मानिला के संतजी ने अपने वचन का पालन किया परन्तु अधिक समय तक वह अपने वचन को नहीं निभा पाये और कुछ समयान्तराल के पश्चात उन्होंने इस प्रकरण को साझा कर दिया उनके साझा करने के तीसरे दिन मां मानिला के वे दिव्य संत ने अपना शरीर छोड़ दिया यह समाधि  उन्हीं संत जी की है ऐसे संत जी को प्रणाम ।

मां मानिला सभी का कल्याण करे 💐🙏


परिपूर्ण वात्सायन मनराल 

ग्राम व पत्रालय: सैणमानूर 

तहसील: भिक्यासैण 

जिला: अल्मोड़ा उत्तराखंड

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