कत्यूरी सम्राट राजा बिरमदेव (ब्रह्मदेव): जै बिरमाज्यू को आल बांको ढाल बांकों तसरी कमाण बांको जीरो सेरा बांकों नवाण को सेरा बांकों दखणपुर बांकी लखनपुर बांकी आसण बांको सिंहासन बांकों सेज की कटेहेरिया राणी बांकी खोली को भीखा पहरी बांकों गोदी को खिलान सात ललियां बांकी राजा बिरमा लखणपुर में बैठनी लली, नारिंगी , सारिंगी , पूतना, रौतेली कासाणी, दूधकेला सात ललियां बांकी जै बिरमा को घट बौया छीं जतिया मारखुली छी, कुकरा खदुवा छी उल्ट नाई ले लिनी पैंचा, सुल्ट नाई ले दिनी सात खौवा बतौनीं चालनैल चाई लिनी माल मली, सौकाण तली की दसौत उंघूंनी गरम पाखी, चासिंगिया लाखा, भोटियालू कामला लिनीं अचारी करनी बिबी ढकूंनी तरुणी तिरिया हिटन नि दिनीं डोली में भेजनी बरड़ो बाकरो लै चरन दिनीं उकणी नीं खाणी हिन्दी भावार्थ: कत्यूरी राज्य बहुत समृद्ध था और उन पर परमात्मा की बहुत कृपा थी जिससे की उनकी भौतिक वस्तुएं भी जीवंत की तरह कार्य करती थी राजा बिरमा का आल (राज्य), ढाल कमान रखे तीर बाण, खेत खलिहान, दखणपुर ( वर्तमान ढिकुली / गर्जिया), लखनपुर र...