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मार्च, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कत्यूरी राजवंश ने उत्तराखण्ड पर लगभग तीन शताब्दियों तक एकछत्र राज किया

 कत्यूरी राजवंश ने उत्तराखण्ड पर लगभग तीन शताब्दियों तक एकछत्र राज किया. कत्यूरी राजवंश की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने अजेय मानी जाने वाली मगध की विजयवाहिनी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. (Katyuri Dynasty of Uttarakhand) मुद्राराक्षस के ऐतिहासिक संस्कृति रचियता लेखक विशाख दत्त ने चंद्र गुप्त मौर्य और कत्यूरी राजवंश  संधि हुई है का विषय में वर्णन किया है चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य संपूर्ण अखंड भारतवर्ष में अंपायर का संघर्षरत विस्तार कर रहे थे | उसे समय मगध डायनेस्टी का हिस्सा ( प्रांत गोरखपुर ) भी रहा है | आज से लगभग 2320 se 2345 साल पहले चंद्रगुप्त का राज था और लगभग ढाई हजार साल पहले शालीवहांन देव अयोध्या से उत्तराखंड आ चुके थे चंद्रगुप्त मौर्य 320 से298  ई0पूर्व का मगध के राजा थे  कत्यूरी राजवंश की पृष्ठभूमि, प्रवर्तक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में उभरने का कोई प्रमाणिक लेखा-जोखा नहीं मिलता है. यह इतिहासकारों के लिए अभी शोध का विषय ही है. इस सम्बन्ध में मिलने वाले अभिलेखों से कत्यूरी शासकों का परिचय तो मिलता है लेकिन इसके काल निर्धा...

माता सीता की वंशावली

 अपरिवर्तनशील ब्रह्मा 2. ब्रह्मा से उत्पन्न मरीचि 3. मरीचि के पुत्र कश्यप 4. कश्यप से उत्पन्न विवस्वान या सूर्य-देवता 5. विवस्वान के पुत्र मनु 6. इक्ष्वाकु, मनु के पुत्र और अयोध्या के पहले राजा 7. इक्ष्वाकु के पुत्र निमि 8. निमि के पुत्र मिथि 9. मिथि के पुत्र जनक 10. जनक 1 के पुत्र उदावसु 11. उदावसु के पुत्र नंदिवर्धन 12. नंदीवर्धन के पुत्र सुकेतु 13. सुकेतु का पुत्र देवरात 14. देवरात का पुत्र बृहद्रथ 15. बृहद्रथ का पुत्र महावीर 16. महावीर का पुत्र सुधृति 17. सुधृति का पुत्र धृष्टकेतु 18. धृष्टकेतु का पुत्र हर्यश्व 19. हर्यश्व के पुत्र मरु 20. मरु के पुत्र प्रतिन्धक 21. प्रतिन्धक के पुत्र कीर्तिरथ 22. कीर्तिरथ के पुत्र देवमिद्ध 23. देवमिद्ध के पुत्र विबुध 24. विबुध के पुत्र महीद्रक 25. कीर्तिरथ, महीद्रक का पुत्र 26. महारोमा, कीर्तिरात का पुत्र 27. स्वर्णरोमा, महारोमा का पुत्र 28. ह्रस्वरोमा, स्वर्णरोमा का पुत्र 29ए। जनक, ह्रस्वरोमा 29बी के बड़े पुत्र । कुशध्वज, ह्रस्वरोमा का छोटा पुत्र

महाभारत में सूर्य वंश की वंशावली मिलती है

 महाभारत में सूर्य वंश की वंशावली मिलती है। वैवस्वत मनु से सूर्य वंश की शुरुआत मानी गई है। महाभारत में पुलस्त्य ने भीष्म को सूर्य वंश का विवरण बताया सूर्यवंश वंशावली सतयुग 1.आदित्य नारायण 2.ब्रह्मा 3 मरीचि (पत्नि सुमति) 4 कश्यप ( पत्नि अदिति (दक्षपुत्री)) __________________________ सूर्य 5 विवस्वान सूर्य 6 मनु (वैवस्वत+पत्नि संक्षा, अयोध्या बसाई) (मनु के पुत्र-ऐक्ष्वाकु, नाभाग, धृष्ट, प्रासु, शर्याति, नरिष्यन, नागाभोदिष, करुष, प्रसघ्र- पुत्री ईला) 7 ऐक्ष्वाकु (ऐक्ष्वाकु वंश कहलाया) (ऐक्ष्वाकु के पुत्र-विकुक्षी, निमि, दंड, नाभागारिष्ट, कुरुष, कुबद्ध) (इनके 100 पुत्र थे, 50 उत्तरपंथ के राजवंश के स्थापक बने, 50 दक्षिणपंथ के राजवंश के स्थापक बने) 8 विकुक्षी (शशाद) 9 पुरंजय (कुकुत्स्थ) (देवासुर संग्राम मे देवता की मदद की) 10 अनेना (वेन) __________________________ *पृथु* 11 पृथु 12 विश्वरंधि (विश्वराश्व) 13 चंद्र (आर्द्र) 14 युवनाश्व 15 श्रावस्त (श्रावस्ति नगरी बसाई) 16 बृहद्श्व (लंबा आयुष्य भोग, वानप्रस्थ लिया) 17 कुवल्याश्व (धंधुमार) (धंधुमार के पुत्र- द्रढाश्व, चंद्रश्व, कायलाश्व, भद्...

महाराजाधिराज लखनपालदेव ने कात्र्तिकेयपुर में बैजनाथ का मन्दिर बनवाया था

 हाल ही में अल्मोड़ा पुरातत्व विभाग के अन्वेषण सहायक डाॅ. चन्द्र सिंह चैहान ने बैजनाथ के महन्त की कुटिया से राजा लखनपाल का एक विशाल शिलालेख का पता लगाया है जिससे पता चलता है कि महाराजाधिराज लखनपालदेव ने कात्र्तिकेयपुर में बैजनाथ का मन्दिर बनवाया था। अभी तक लेखपाल के तीन लेख ज्ञात थे- (1) गणानाथ की लक्ष्मी- नारायण की मूर्ति के पाद लेख से पता चलता है कि उसका निर्माण राजा लखनपाल ने 1105 ई. में करवाया था। (2) बैजनाथ संग्रहालय अथवा गोदाम में बन्द कुमाउनी भाषा के उन्नीस पंक्ति के शिलालेख से पता चलता है कि राजा लखनपाल ने बैजनाथ मन्दिर की पूजा-व्यवस्था के लिए चनौदा गाँव दान किया था। उसमें ‘बैजनाथ हुनि दीन्ही’ का प्रयोग होने से यह स्पष्ट है कि लखनपाल के राज्य में संस्कृत भाषा के साथ-साथ कुमाउनी भाषा का प्रयोग भी होने लगा था। (3) तीसरा शिलालेख बदायूँ से मिला है जो कत्यूरी साम्राज्य में ‘वाँधवगढ़’ कहलाता था। मध्यकालीन तुर्क इतिहासकारों के अनुसार बदायूँ कटेहर (आधुनिक रुहेलखंड) राजधानी थी। उसके लिए दिल्ली सल्तनत और कत्यूरी राज्य में निरन्तर संघर्ष चलता रहता था। लखनपाल का बदायूँ लेख भारतीय पुरात...